Dhatu Kriya kise kahate hain: के मूल अंश (अंग) को कहते हैं।
जैसे- उठ, चल, देख, लिख, उड़ आदि।

धातु के भेद | Dhatu Ke Bhed

धातु के निम्नलिखित पांच भेद होते हैं-

सामान्य धातु किसे कहते हैं?

मूल धातु में “ना प्रत्यय” जोड़कर बनाए गए को सामान्य धातु कहते हैं।
जैसे-
पढ़+ना= पढ़ना
उठ+ना=उठना
उपयुक्त उदाहरण से स्पष्ट हो रहा है की मूल धातु पढ़ में ना प्रत्यय जोड़कर पढ़ना शब्द बनाया गया है। इसलिए पढ़ना सामान्य धातु है। वैसे ही उठना भी सामान्य धातु है।
नोट- मूल धातु स्वतंत्र होते हैं।
जैसे- पढ़, उठ

व्युत्पन्न धातु किसे कहते हैं?

जो धातु सामान्य धातु में प्रत्यय जोड़कर अथवा किसी अन्य प्रकार से बनाई जाती है। उसे…


March 30, 2021 / / HindiGrammar / kriya, kriya kise kahate hain, काल किसे कहते हैं, क्रिया, क्रिया कितने प्रकार के होते हैं, क्रिया किसे कहते हैं, क्रिया के भेद, क्रिया परिभाषा, क्रिया शब्द, प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं, सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं / 5 minutes of reading / By

क्रिया परिभाषा: जिस से किसी काम (कार्य) को करने या होने का बोध हो अथवा किसी स्थिति का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- हाथी धीरे-धीरे चलता है। मीरा झूला झूल रही है। हवा बह रही है। उपयुक्त उदाहरण में चलना, झूलना क्रिया है। क्योंकि इन शब्दों से…


March 20, 2021 / / letter / अपने प्राचार्य को शुल्क माफी के लिए प्रार्थना पत्र लिखिए, प्रधानाचार्य को शुल्क मुक्ति हेतु प्रार्थना पत्र, फीस माफी के लिए प्रार्थना पत्र हिंदी में, विद्यालय के प्रधानाचार्य को शुल्क माफी के लिए प्रार्थना पत्र लिखिए, शुल्क माफ करने हेतु प्रधानाचार्य को पत्र, शुल्क माफी के लिए पत्र, शुल्क माफी के लिए पत्र in English, शुल्क माफी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र, शुल्क माफी हेतु प्रार्थना पत्र in English, शुल्क माफी हेतु प्रार्थना पत्र Sanskrit, शुल्क माफी हेतु प्रार्थना पत्र संस्कृत में / 1 minute of reading / By

शुल्क माफी के…


Rakesh Tikait Biography in Hindi : राकेश टिकैत की जीवन परिचय

राकेश टिकैत कौन है? Who is Rakesh Tikait?

राकेश टिकैत एक व्यवहारिक किसान नेता है। वह भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता है। राकेश टिकैत के पिताजी का नाम महेंद्र सिंह टिकैत है। महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के भूतपूर्व अध्यक्ष थे। राकेश टिकैत अपने पिता के द्वितीय सुपुत्र हैं।

राकेश टिकैत का पारिवारिक जीवन | Rakesh Tikait Biography in Hindi

Rakesh Tikait Biography in Hindi: राकेश टिकैत एक प्रसिद्ध व्यवहारिक किसान नेता है। वह बलयान खाप से संबंधित है। इनके तीन संताने हैं। एक पुत्र और दो पुत्री जिनके नाम है क्रमशः चरण सिंह, सीमा और ज्योति। उनके तीनों संतानों की शादी हो चुकी है।

राकेश…


Sarvnaam Kya Hai? Sarvnaam Kya Hota Hai? सर्वनाम क्या है? सर्वनाम क्या होता है?

Sarvnaam Kya Hai? सर्वनाम (Pronoun) शब्द का अर्थ है — सभी का नाम । संज्ञा जहाँ केवल उसी नाम का बोध कराती है, जिसका वह नाम है। वही पर सर्वनाम सबके नाम का बोध कराता है।

Sarvnam Kise Kahate Hain? सर्वनाम किसे कहते हैं? इसके कितने भेद होते हैं?

सर्वनाम की परिभाषा (Sarvanam Ki Paribhasha) — “संज्ञा (नाम) के स्थान पर प्रयोग किया जाने वाला शब्द को सर्वनाम कहते हैं।” अर्थात् आसान शब्दों में सर्व मतलब (सब) नाम मतलब (संज्ञा) के जगह पर जो शब्द आता है, उसे ‘सर्वनाम’ कहते हैं।

सर्वनाम शब्द जैसे- मै, तू, वह, कौन, क्या, जो, सो, आप, कोई, यह, ये, वे, हम, तुम, कुछ, उसका आदि सर्वनाम शब्द…


विशेषण किसे कहते हैं? Visheshan Kise Kahate Hain?

विशेषण की परिभाषा: जिस शब्द से तथा की विशेषता का बोध हो उस शब्द को विशेषण कहते हैं। यहां विशेषता का अर्थ है, उस शब्द की कोई विशेष या खास बात।
जैसे-
राम सुंदर लड़का है।
सीता सुरीला गाती है।
फल मीठा है।
यहां सुंदर, सुरीला, मीठा शब्द विशेषण है। जो क्रमशः संज्ञा शब्द राम, सीता, फल की विशेषता को बता रहा है।


संज्ञा व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग हैं। हिंदी व्याकरण का ज्ञान होने के लिए संज्ञा के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है।

संज्ञा संसार के हर चीज़ में व्याप्त है। चाहे संसार का कोई प्राणी, वस्तु या फिर भाव हो। हर चीज़ से संज्ञा का बोध होता है। इसी ज्ञान के बारे में हम विस्तारपूर्वक आगे जानेंगें।

संज्ञा (Noun) क्या है?

संज्ञा शब्द क्या होता है? हिंदी व्याकरण में संज्ञा शब्द को एक विकारी शब्द कहा गया है। जिसका अर्थ होता है “परिवर्तन” अर्थात् जिसमे हम बदलाव ला सके।

संज्ञा (Noun) किसे कहते हैं? संज्ञा (Noun) की परिभाषा क्या है?

किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।

नाम…


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Kavi Aur Dhanwan Aadmi — कवि और धनवान आदमी: एक दिन की बात है। एक बहुत ही गुणवान कवि अपनी कविता के माध्यम से कुछ धनअर्जित करना चाहता था। यह विचार कर वह एक धनवान व्यक्ति के घर गया और उसे अपनी सुंदर — सुंदर कविता सुनाई। कवि सोचा कि धनी व्यक्ति उसकी सुंदर कविताएँ सुनकर प्रसन्न होगा और उसे इनाम के रूप में धन देगा। परंतु वह धनी व्यक्ति उसे कोई इनाम नहीं दिया। बल्कि वह बोला- तुमने मुझे अपने कविताएँ सुनाकर मुझे प्रसन्न कर दिया है। तुम कल जरूर आना। मैं भी तुम्हें प्रसन्न करना चाहता हूँ।

कवि और धनवान आदमी — Kavi Aur Dhanwan Aadmi

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